Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
आब्रह्मलोकपातालं शान्तं शून्यमथाभवत् ।
रजोधूमानिलाम्भोधिभूतमुक्तं समं नभः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके बाद ब्रह्मलोक से लेकर
पातालतक सब स्थान ऐसे शान्त और शून्य हो गया, जैसे धूल, धूम्र, वायु और मेघ-इन भूतों
से रहित सब तरह के वैषम्य से निर्मुक्त आकाश