Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
केवलं तत्र दृश्यन्ते चत्वारो व्योमनिर्मलाः ।
इमे पदार्था निस्पन्दाः श्रृणु तान्रघुनन्दन ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय वहाँ आकाश के समान
निर्मल तथा स्पन्दशून्य ये केवल चार पदार्थ ही दीख रहे थे । हे रघुनन्दन, उन्हें आप सुनिये
(मैं कहता हूँ)