Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
एकस्तावदसौ मध्ये रुद्रः कृष्णाम्बराकृतिः ।
निराधारः स्थितो व्योम्नि निस्पन्दामोदबिम्बवत् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
उनके मध्य में एक तो काले रंग के आकाश के सदृश आकृतिवाले,
निराकार भगवान् रुद्रदेव स्पन्दशून्य सौरभ बिम्बकी तरह आकाश में स्थित थे