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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 41

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

द्वितीयोऽवस्थितो दूरे पृथ्व्याकाशतलोपमः । भागो ब्रह्माण्डसदनस्याधः पातालसप्तकात् ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

दूसरा सप्त पाताल के बहुत दूर पृथिवी ओर आकाशतल के सदृश ब्रह्माण्ड सदन का अधोभाग स्थित था