Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
अवलम्ब्य तदेवान्तः संस्थितास्तैजसादयः ।
न स्थितिं प्रविमुञ्चन्ति स्वां यथावयवा इव ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे शरीर में संयुक्त हाथ, पैर आदि
अवयव अपनी अत्यन्त दृढ़संयोग स्थिति को नहीं छोड़ते वैसे ही उसीका आभ्यन्तर अवलम्बन
करके तैजस आदि सब पदार्थ अवस्थित हैं