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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 80, Verse 59

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 80, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

चितौ संकल्पनगरं ब्रह्माण्डाख्यं जगद्गृहम् । खे खमेवाप्यनाकारं प्रत्याकारमिव स्थितम् ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, चिति में ब्रह्माण्डनामक संकल्पनगर है, उसके अन्दर अनेक जगत्रूपी घर हैं । चिदाकाश में निराकार ही प्रतिनियताकार के समान यानी नियत आकारवाले के सदृश स्थित है