Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 101

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 101 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 101

संस्कृत श्लोक

वन्द्यमानस्तया सोऽपि तथैवाकाशभैरवः । तथैव वितताकारस्तदोच्चैः परिनृत्यति ॥ १०१ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार भयंकर रूप धारण करनेवाली उस कालरात्रि के द्वारा वन्दित हो रहे उसी प्रकार का आकाश के सदृश विशाल भयंकर रूप धारण किये हुए अनन्ताकृति रुद्र भी देवी के सदृश महानृत्य कर रहे थे