Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
कृशा बहूपवासेव परिनिम्नमहातनुः ।
कज्जलश्यामला मेघमालेव पवनाकुला ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
उसे देखने से यही प्रतीति हो रही थी, मानों बहुत दिनों तक अधिक उपवास करने से ही यह ऐसी
दुबली हो गई है । उसकी लम्बी देह में सर्वत्र गड्ढे ही गड्ढे दीख रहे थे कज्जल के सदृश श्याम
वर्ण की वह पवन से आकुल मेघो की माला जैसी थी