Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
कृशाशक्ता यदा स्थातुं सुदीर्घा विधिना तदा ।
ग्रथितेव शिरारूपैर्दामभिर्दैर्घ्यशालिभिः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
उसे देखने से ऐसा भान हो रहा था कि
अत्यन्त लम्बी ओर दुबली उसे खडी होने में भी जब विधाता ने असमर्थ देखा है तब मानों उन्होने
शिरारूपी लम्बी रस्सियों से बाँध दिया है, ताकि यह अच्छी तरह खडी रहे