Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
नीलगेघांशुकावृत्तिवातघुंघुमिताम्बरम् ।
काष्ठास्थ्यादिस्फुटास्फोटपटत्पटपटारवम् ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
उस नर्तन में ऊपर नीलमेघरूपी वस्त्रो
का परिचालन होने पर वायुओं से आकाशमण्डल घुंघुम ध्वनि से पूर्ण हो गया था, और नीचे
परस्पर टक्कर खाये हुए काष्ठ, अस्थि आदि के सन्धिभेद से हो रही पटपट ध्वनि से व्याप्त हो गया
था