Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
खमेव तस्याः संपन्नं कबरीमण्डलं बृहत् ।
पातालं चरणौ भूमिरुदरं बाहवो दिशः ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
अब सारा जग्रत् उत भगवती का अग्रसमूह् बन गया था, यह वर्णन करते हैं /
आकाश ही उसका बड़ा केशपाश (जूडा) बन गया था, पाताल चरण बन गये थे,
भूमिमण्डल उदर बना था ओर दिशासमूह बाहु बन गये थे