Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 61
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हिन्दी अर्थ
उस भगवती की जो आँतों
से युक्त वलियाँ थीं, वे द्वीप और समुद्र ही थे, जो पसलियाँ थी, वे सारे पर्वत थे, ओर जो
चंचल प्राण ओर अपान थे, वे सारे आवह आदि पवनस्कन्धरूप आकाश-महल की शालिकाएँ
ही थीं