Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
तदानुभूत्ं नृत्यन्त्यास्तस्या वपुषि विस्तृते ।
हिमवन्मेरुस्रह्याद्यैर्दोलनभ्रममद्रिभिः ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
जब भगवती कालरात्रि नृत्य करती थी, तब उसके विशाल शरीर के ऊपर
हिमालय, मेरु, सहाद्रि आदि पर्वतां ने झूले के आनन्द का अनुभव किया