Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 81, Verse 93
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 81, verse 93 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 93
संस्कृत श्लोक
यस्मात्सा सकला देवी संविच्छक्तिर्जगन्मयी ।
अनन्ता परमाकाशकोशशुद्धशरीरिणी ॥ ९३ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि सर्वविध कलाओं से परिपूर्ण जगतात्मक यह देवी संवित्-
शक्तिरूपा है, इसलिए अनन्त एवं विशाल आकाश कोश के सदुश विशुद्ध स्वरूपवाली है