Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 83, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
शिवयोरेवमाकारो निराकारोऽङ्ग वर्णितः ।
अधुना श्रृणु ते वक्ष्ये नृत्यस्यानृत्ततास्थितिम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस तरह मैंने भगवान् भैरव
तथा भैरवी के आकार का वर्णन किया, जो तत्त्वतः निराकार है, अब मैं उनकी नृत्यस्थिति का
आपसे वर्णन करने चल रहा हूँ, जो वस्तुतः अनृत्यस्वरूप है, आप सुनते रहिये