Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 83, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
यन्नाम चेतनं यत्र तदवश्यं स्वभावतः ।
स्पन्दधर्मि भवत्येव वस्तुता हि स्वभावजा ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जो चेतन है, जिसमें चेतनत्व अवश्य
स्वभावतः है, वह स्पन्दधर्मवाला होता ही है, क्योकि अधिष्ठानता स्वाभाविक होती है, इसमें
सन्देह नहीं है