Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 84, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
जया जयैकनिष्ठत्वात्सिद्धा सिद्धिसमाश्रयात् ।
जयन्ती च जया प्रोक्ता विजया विजयाश्रयात् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जब वह एकमात्र जयनिष्ठ हो जाती है, तब जया, सिद्धों
की शरण होने से सिद्धा, जया होने से जयन्ती तथा विजय का आश्रय होने से विजया कही
जाती है