Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 84, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
गायत्री गायनात्मत्वात्सावित्री प्रसवस्थितेः ।
सरणात्सर्वदृष्टीनां कथितैषा सरस्वती ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
जप
करनेवालों के लिए परमपुरुषार्थरूप होने के कारण गायत्री, प्रसवकी भूमि होने से सावित्री तथा
स्वर्ग-अपवर्ग के साधन एवं समस्त कर्मउपासना के विज्ञानो की विस्ताररूप होने से सरस्वती
भी वही कही जाती है