Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 84, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
भूतभव्यभविष्यस्थाः संकल्पस्वप्नपूर्गणाः ।
सर्वे सत्याः परं तत्त्वं सर्वात्मा कथमन्यथा ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
भूत, वर्तमान, एवं भविष्य के जितने भी
संकल्प, स्वप्न आदि के नगर आदि हैं वे सब सत्य ही हैं, यदि सत्य न हों, तो सर्वात्मा ब्रह्म
चोटी का तत्त्व कैसे हो सकेगा ? कहीं भी अत्यन्त असत् वस्तु का तात्त्विकरूप आत्मा प्रसिद्ध
नहीं है