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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 49

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 84, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

संकल्पने मनोराज्ये स्वप्ने संकथने भ्रमे । यथापुरानुभवनं त्रैलोक्यानुभवं तथा ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे राघव, संकल्प, मनोराज्य, स्वप्न, कथा एवं भ्रमदशा में जैसे नगरों का अनुभव भ्रान्तिमात्र है, वैसे ही इस त्रैलोक्यानुभव को भी आप भ्रान्तिरूप ही समझिये