Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

अनादिमध्यपर्यन्तं संविदाकाशमात्रकम् । इत्यहं दृष्टवांस्तत्र कल्पान्तमुरुविभ्रमम् ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

अब पाषाणोदर-कथाकी समाप्ति दशति हुए उफसलार करते हैं / भद्र, इस प्रकार उस शिला के टुकड़े के कोटर में मैंने दर्पण में प्रतिबिम्ब-सा महान्‌ विभ्रमरूप संसार एवं उसका महाप्रलय देखा