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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

राजद्वारगतो ग्राम्य इवाहं विस्मयं गतः । तामालोकितवान्भूयः कलूधौतशिलामहम् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

पुनः उस सुवर्ण की शिला को भने पूर्व प्रदेश से अन्य प्रदेशों में भी देखा उसके अशेष अंगों में सभी जगह कालरात्रि के अंगों के सदृश अनेक सृष्ट्या विद्यमान थीं