Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
क्वचित्किंचिदखातोग्रचतुःसागरखातकम् ।
कचित्किंचिदसंजातसुरसंजातदानवम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर कोई जगत् तो देवताओं की उत्पत्ति से शून्य और दानवों की
उत्पत्ति से युक्त देखने में आया, तो कहीं पर कुछ जगत् सतयुग के आचरण और सज्जन प्राणियों
से भरा मैंने देखा