Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
क्वचित्किंचित्कृतयुगाचारसज्जनभूतकम् ।
क्वचित्किंचित्कलियुगाचारदुर्जनभूतकम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, कहीं पर कुछ जगत् कलियुग के आचरणों से युक्त तथा दुर्जन प्राणियों
से भरे थे, तो कहीं पर कुछ जगत् नगरों की राशियों एवं दैत्यों के संग्रामों से अति संकीर्ण थे