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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

क्वचित्किंचिच्च दैत्यौघविलुण्ठितसुरालयम् । क्वचित्किंचित्सुरोद्यानगायद्गन्धर्वकिन्नरम् ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं किसी जगत्‌ में देवता ओर दानवाँ मे समुद्रमंथन के लिए बना हुआ उत्तम सौहार्द (मेल) देखने में आया