Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
क्वचित्किंचित्समारब्धगीर्वाणासुरसौहृदम् ।
भूतभव्यभविष्यत्स्थजगदाडम्बरं मया ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, इस प्रकार भूत, वर्तमान एवं भविष्य काल के महान् जगदाडम्बर को मेने उस
समय विश्वरूप महादेवजी के स्वरूप में यानी मायायुक्त चिदाकाश में देखा