Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
तदानुभूतं वपुषि महाविश्वगणात्मनि ।
एकत्र कल्पविक्षुब्धपुष्करावर्तमन्थरम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी जग्रत् के आडम्वर्यो को फिर दशति हैं /
कहीं पर जगत् कल्पकाल के कुपित पुष्करावर्त मेघों के कारण व्याकुल कहींपर शान्त
समस्त भूतो के समूहों से उपद्रवरहित था