Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
एकत्र नलिनीनालनिलीनमधुकैटभम् ।
एकत्र पद्ममञ्जूषासुप्तबालनवाब्जजम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी जगत् में नवीन ब्रह्माजी कमल की पिटारी में बालकरूपमें सोये पड़े थे, किसी
जगत् में तो महाप्रलय में उन्नत अग्रभागवाले अक्षय वटके पत्ते के ऊपर भगवान् नारायण
विश्राम ले रहे थे