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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

एकत्रैकार्णवोदग्रवृक्षविश्रान्तमाधवम् । एकत्र कल्परजनीनिःशून्यतिमिराकुलम् ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

किसी जगत्‌ में प्रलयरूपी महारात्रि का अतिशून्यरूप यानी प्रकाशरहित गाढ अंधेरा छाया हुआ था, तो किसी में शिला के पेट के सदृश निश्चल विशालाकृति आकाश ही दीख पड़ता था