Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
एकत्र वज्रनिष्पेषद्रवद्भूधरभासुरम् ।
एकत्रोद्वृत्तमत्ताब्धिह्रियमाणधराचलम् ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
किसीमें तो तरंगमालाओं से आकुल प्रमत्त समुद्र पृथ्वी ओर पर्वतो को
ले जाते हुए दीख पड़े और कहींपर त्रिपुरासुर, वुत्रासुर, अन्धकासुर तथा बलि के संग्राम हो
रहे थे, इससे वह बड़ा भयंकर प्रतीत हो रहा था