Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
एकत्र शेषशिरसः कल्पान्तलुठितावनि ।
क्वचिदल्पेन रामेण हतरावणराक्षसम् ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी
स्थान में छोटे बालकरूप रामजी राक्षस रावण को नष्ट कर रहे थे, तो किसी में राक्षस रावण
ही सीता-हरण द्वारा राघव को ठग रहा था