Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 87, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
याभ्यामपश्यं रन्ध्राभ्यां त इमे लोचने स्थिते ।
ततः किंचिच्छृणोमीति संविदित्युदिता मम ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिन दो छिद्रों से मैंने देखा वे दोनों ये मेरे
नेत्र स्थित हैं । इसके बाद "में कुछ सुरू" यह वृत्ति मुझमें उदित हुई