Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 87, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
स्पर्शसंवेदनं किंचिदहमत्रानुभूतवान् ।
येन नाम प्रदेशेन तेन सा त्वक्च कथ्यते ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर जिस प्रदेश से मैंने वहाँ
जो कुछ थोड़ा-बहुत स्पर्शं संवेदन का अनुभव किया, उसको त्वक् कहते हैं