Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 87, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
अथ पूर्वं कृतः शब्दो बालेनेव तदोमिति ।
ततः स एष ओंकार इति नीतः पुनः प्रथाम् ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
विशेष शब्द का अभिलाय करने में कोड विनियमक न होने के कारण स्र्वत्नाधारण अर्थवाले
शब्दसमष्टयात्यक उकार का ही मैंने पहले-पहल उच्चारण किया, यह कहते हैं ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, इसके बाद पहले-पहल मैंने बालक की नाई जो शब्द किया वह ॐ था ।
वही शब्द आगे चल कर संसार में "ॐकार" इस नाम से प्रसिद्धि को प्राप्त हुआ