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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 54

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 87, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

आतिवाहिकदेहेन परं बोधदृशा यदि । प्रेक्ष्यते दृश्यते सर्गः परमात्मैव चामलः ॥ ५४ ॥

हिन्दी अर्थ

आतिवाहिक देह से यदि परमबोधदृष्टि से देखा जाय, तो वह सृष्टि निर्मल परमात्मस्वरूप ही योगियों को दिखाई देती है