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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 88, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 88, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 88 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

क्वचिन्मरणसाक्रन्दनारीकरुणवेदनम् । क्वचिदुत्ताण्डवस्त्रैणमहोत्सवमहासुखम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं पर तो भूपीठ में पति, पुत्र, भाई आदि के मरण से विलाप कर रही स्त्रियों की करुणवेदना सुनाई दे देती थी, तो कहीं पर उन्नत ताण्डव नृत्य कर रही रमणियों के महान्‌ उत्सवों से आनन्द की धूम मची थी