Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 89, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
चिद्रूपस्यात्मनो नान्यः संकल्पस्तन्मयं जगत् ।
वस्तुतस्तु न सत्यात्म न पिण्डात्म न भासुरम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
चिद्रूप आत्मा का संकल्प चिद्रूप से भिन्न नहीं है, इसलिए जगत् तन्मय ही
है। वस्तुतः जगत् न तो सत्यरूप है, न पिण्डरूप है और न भासमान ही है