Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 89, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
मणिर्यथा स्वभावेन शुक्लपीतादिकास्त्विषः ।
अकुर्वन्नेव कुरुते चिदाकाशस्तथा जगत् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वैडूर्य आदि
मणि कुछ व्यापार न करती हुई भी स्वभावतः शुक्ल, पीत आदि किरणों का निर्माण करती है