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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 49

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

तदा मयैवं शुद्धेन तत्कृतं ब्रह्मरूपिणा । ब्रह्मरूपादृते किंचिदेतत्कर्तुर्न युज्यते ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, उन धारणाओं में मैंने जो कुछ उस प्रकार का जगन्निर्माण किया, वह सब विशुद्ध ब्रह्मरूप बनकर ही किया, क्योंकि जगन्निर्माण करनेवाले का शुद्ध ब्रह्मरूप के बिना कुछ रूप हो ही नहीं सकता