Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
यदा सर्वमिदं दृश्यं जातं ब्रह्म निरामयम् ।
तदा ब्रह्मपदस्थेन मयात्मैवैवमीक्षितः ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
जब परमार्थ-दशा में यह सब कुछ दृश्य निर्विकार ब्रह्मरूप ही सिद्ध हुआ
तब ब्रह्मपद में ही रहकर मैंने अपनी आत्मा को उक्त नानाविध जगत् के रूप में देखा, यह
बात निश्चितरूप से आप जान लीजिये