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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 66

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 66

संस्कृत श्लोक

तेजस्तयापि परमाणुकणोदरेऽपि दृष्टेत्थमेवमिह राम मया जगच्छ्रीः । अन्या च सा न च चिदम्बरतः परस्मात्स्वप्ने पुराचलगणोऽत्र निदर्शनं वः ॥ ६६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे रामजी, तेजःस्वरूप बनकर मेने परमाणु कणों के भीतर इसी तरह की जिस प्रत्येक जगत्‌-शोभा का अवलोकन किया, वह जगत्‌-शोभा ओर आप जिसे देख रहे है, वह जगत्‌-शोभा दोनों सर्वोच्च चिदाकाश से भिन्न नहीं है, इस विषय में दृष्टान्त-आपके स्वप्न के प्रसिद्ध नगर या पर्वत-विद्यमान हैं