Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
सर्वर्तुवनजालेषु नानामोदानि दिक्ष्वलम् ।
भुक्तानि पुष्पजालानि प्रोच्छिष्टं ददताऽलये ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने उपभोग के बाद बचा हुआ पुष्परस
भ्रमर को देते उए मैंने सभी ऋतुओं में सब ओर विविध सुगन्धो से पूर्णं पुष्पराशियों का खूब आनन्द
लिया