Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
ततोन्नतासु मृद्वीषु स्वास्तीर्णास्वम्बराजिरे ।
सुप्तं शुभ्राभ्रमालासु नवनीतस्थलीष्विव ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
विस्तीर्ण, उन्नत, कोमल तथा आकाशरूपी आँगन में कलापूर्णरूप रीति से बिछाई
हुई, मक्खन की स्थलिर्योँ-सी धवल अभ्रमालाओं के ऊपर शयन किया