Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
सुमनःपत्रमृदुषु नीललक्ष्मीविलासिषु ।
सुरसिद्धाङ्गनाङ्गेषु दूरास्तस्मरवासनम् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, शिरीष के
फूलों से भी अधिक कोमल तथा नीलकमल की-सी मनोहर कान्तिवाली देवांगनाओं तथा सिद्ध-
सहचारियों के मध्य में काम की वासना को दूर फेंककर ही शयन किया