Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
कृतः कुमुदकह्रारकमले नलिनीवने ।
कोमलः कलहंसीभिर्लीलाकलकलारवः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
कुमुद, कह्लार तथा
कमलों से पूर्ण रम्य वनों मे तथा कमलिनियों के जंगलों में मेने मधुरभाषिणी हंसियों के साथ बड़ा
ही सुमधुर लीलाकलकल निनाद किया