Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
सरत्सरिच्छिरासारा मूलभूमण्डलान्विताः ।
अङ्गैरूढाः स्फुरद्भूता लोमालय इवाद्रयः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
रामजी, बह रहीं नदीरूप सारवान् नाड़ियों के
मूलभूत भूमण्डलों से युक्त तथा स्फुरणशील व्याघ्रादि भूतगणो से शोभित पर्वतां को ब्रह्माण्डरूपधारी
मैंने अपने अंगों से रोमों की पंक्तियों की तरह धारण किया