Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
खाद्रयः प्रथिता दीर्घसरित्सूत्रैः समुद्रकैः ।
आदर्शैरिव विश्रान्तमङ्गेषु प्रतिबिम्बिभिः ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
जगत् में जो गगन, पर्वत आदि
प्रसिद्ध हैं, उन्होने नदीरूप सूत्र एवं समुद्रो के साथ मेरे अंगों मे प्रतिबिम्ब सहित दर्पणो की नाई
विश्राम किया