Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
भूतसर्गेण विश्रान्तं सिद्धविद्याधरादिना ।
मद्देहे चेतितेनेव मक्षिकायौकरूपिणा ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
सिद्ध, विद्याधर आदि प्राणियों के समूहों ने ब्रह्माण्डभूत मेरे शरीर में विश्राम
किया । वे मेरी देह में मक्खी ओर जूँ जैसे प्रतीत होते थे