Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
असंख्यैर्व्योममातङ्गैश्चन्द्रार्कचलचामरैः ।
उदुम्बरान्तर्मशकैरिव मद्धृदये स्थितम् ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरे
हृदयाकाश में असंख्य ऐरावत आदि हाथी गूलर के अन्दर मच्छरों की नाई स्थित थे जिन पर चन्द्र,
सूर्य रूपी चँवर डुल रहे थे