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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 59

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

समुत्पादयताशेषं लतातरुतृणाङ्कुरम् । भूतलेन रसाः कृष्टा मयार्थेनैव पुंभृताम् ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

शरीरधारी जो मनुष्य आदि जीव हैं, उनके उपकारार्थं ही लता, तृण, अंकुर आदि सबका उत्पादन करते हुए मैंने वर्षा से गिरे जलों को भूतलरूप बनकर खींच लिया